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टर्म इंश्योरेंस क्या है? और इसका क्या फायदा है,

टर्म इंश्योरेंस क्या है? और इसका क्या फायदा है,

दोस्तों आजकल हर घर में बच्चे से लेकर बुजुर्ग आदमी तक सभी इंश्योरेंस के बारे में जानते ही हैं. और हर घर में किसी ना किसी के पास कोई ना कोई इंश्योरेंस पॉलिसी तो जरूर होगी. लेकिन बहुत सारे लोग ऐसे हैं. जो किसी भी पालिसी को खरीद लेते हैं. लेकिन वह यह नहीं जानते कि किस इंश्योरेंस पॉलिसी को किस आदमी को कब और क्यों लेना चाहिए. अगर आप भी टर्म इंश्योरेंस को लेकर उलझन में है. और नहीं जानते कि टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी क्या होती है. तो आज हम आपको यह सब बताने वाले हैं.

सबसे पहले आपको टर्म शब्द का मतलब पता होना चाहिए. टर्म का मतलब होता है कि आप किसी निश्चित आयु तक ही इंश्योरेंस ले सकते हैं. और इसमें जीवन भर का इंश्योरेंस आपको नहीं मिलेगा. लेकिन इसके अलावा कई और भी प्लान होते हैं. जो आपको जीवन भर का बीमा देते हैं. लेकिन इन प्लान का प्रीमियम काफी ज्यादा होता है. और आपको इसकी कुछ ज्यादा जरूरत भी नहीं होती.

term insurance

आखिर टर्म इंश्योरेंस सबसे अच्छा क्यों होता है.

टर्म इंश्योरेंस को सबसे अच्छा इसलिए बोला जाता है. क्योंकि इसमें आपको इंश्योरेंस का कवर बहुत ही ज्यादा दिया जाता है. और यहां पर आपको इस इंश्योरेंस का कवर आपकी मासिक आमदनी का 25 गुना ज्यादा दिया जाता है. जैसे कि अगर आप 1 साल में 5 लाख रुपए कमाते हैं. तो आपको एक करोड़ रुपए का इंश्योरेंस आराम से मिल जाता है

टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम कितना होता है.

दोस्तों टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम आपकी आयु पर निर्भर करता है. अगर आपकी आयु 25 साल के आसपास है. तो कंपनी द्वारा आप से कम प्रीमियम लिया जाता है. और आप जितनी कम आयु में इंश्योरेंस करवाते हैं. तो प्रीमियम उतना ही कम होता है. और यह आगे जाकर भी कभी नहीं बढ़ेगा और फिक्स ही रहेगा.

टर्म इंश्योरेंस कंपनी कैसे चुने.

दोस्तों अच्छा टर्म इंश्योरेंस चुनने के लिए आपको नीचे दिए गए पॉइंट को चेक करना बहुत जरूरी है.

क्लेम सेटेलमेंट रेशों. (Claim Settlement Ratio)

क्लेम सेटेलमेंट रेशों चेक करना बहुत जरूरी है. इससे आपको पता लग जाता है. कि कंपनी कितने ज्यादा क्लेम को सेटलमेंट कर रही है.

अमाउंट सेटेलमेंट रेशों. (Amount Settlement Ratio)

क्लेम सेटेलमेंट करते समय बहुत से ऐसे क्लेम होते हैं. जिनकी पेमेंट कम या ज्यादा होती है. इसलिए आपको यह भी चेक करना जरूरी है. कि कंपनी छोटे-छोटे इंश्योरेंस क्लेम तो सेटेलमेंट नहीं कर रही या बड़े क्लेम भी सेटलमेंट कर रही है.

क्लेम रिजेक्टेड रेशों. (Claim Rejected Ratio)

टर्म इंश्योरेंस लेते समय यह चेक करना बहुत जरूरी है. कि कंपनी द्वारा की गई इंश्योरेंस पर जो भी क्लेम आते हैं. वह कंपनी उनमें से कितने क्लेम को रिजेक्ट कर देती है. और उसका क्लेम देने से मना कर देती है.

संपत्ति एसिड अंडर मैनेजमेंट. (Assets Under Management)

एसिड अंडर मैनेजमेंट चेक करना इसलिए जरूरी है. क्योंकि अगर भविष्य में कोई भी ऐसी दुर्घटना हो जाती है. जिससे कंपनी को नुकसान होता है. तो वह अपनी जमा पूंजी को भेजकर लोगों को इंश्योरेंस क्लेम दे सकती है या नहीं.

सॉल्वेंसी रेशों (Solvency Ratio)

सॉल्वेंसी रेशों इसका मतलब होता है कि कंपनी के ऊपर जितना भी कर्जा है. लेकिन उसकी संपत्ति उससे कई गुना ज्यादा होनी चाहिए.

दोस्तों आपको इन सभी चीजों को चेक करने के बाद ही आपको इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदनी चाहिए.

आखिर कंपनियां क्लेम देने से मना क्यों करते हैं.

बहुत से लोगों के साथ ऐसा हो जाता है कि उन्होंने सोच समझकर सबसे अच्छी कंपनियों को चुना होता है. लेकिन फिर भी समय आने पर वह कंपनियां उनके क्लेम को रिजेक्ट कर देती हैं. यह इसलिए होता है. क्योंकि उसे खरीदते समय आपको कई सारे सवालों के जवाब देने पड़ते हैं.

जैसे कि आप धूम्रपान करते हैं या नहीं.

आप शराब पीते हैं या नहीं.

आपको कोई बीमारी है या नहीं.

बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो कि इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम कम करने के लिए इन सब सवालों का गलत जवाब दे देते हैं. लेकिन जब कलीम का समय आता है. तो कंपनी बहुत ही अच्छे तरीके से छानबीन करती हैं. और अगर उनको यह पता लग जाता है कि आपने इंश्योरेंस लेते समय झूठ बोला था. तो आपको वह क्लेम देने से मना कर सकते हैं. इसलिए आपको प्रीमियम कम करने के लिए कोई भी इंफॉर्मेशन गलत नहीं देनी चाहिए. अगर आप शराब यह सिगरेट पीते हैं. तो आपको कंपनी के फोम पर सही लिखना चाहिए. ऐसा करने से आपका पेमेंट तो थोड़ा बढ़ जाता है. लेकिन आगे जाकर आपको कोई भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है.

कई बार क्लेम ना मिलने का यह कारण भी होता है कि आपने जो भी पॉलिसी लेते समय प्रूफ दिए होते हैं. उनके ऊपर गलत इंफॉर्मेशन होती है. लेकिन आपने अपने फोम में कुछ और इंफॉर्मेशन दी होती हैं. जैसे कि आपकी आयु या नाम में कुछ गलती होना.

इंश्योरेंस कंपनियां आपसे क्या छुपाती हैं.

जब भी आप इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं तो आपको दो तरह की पॉलिसिया दी जाती हैं.

लिमिटेड पेमेंट (Limited Pay)

इस इंश्योरेंस पॉलिसी के अंतर्गत आप हर महीने दुगना प्रीमियम भरते हैं. और आपको 10 साल के बाद कोई भी प्रीमियम नहीं देना पड़ता.

रिटर्न ऑफ प्रीमियम (Return of Premium)

इसका यह मतलब होता है कि आप को हर महीने दुगना प्रीमियम देना पड़ता है. लेकिन इसमें यह फर्क है कि अगर पॉलिसी के खत्म होने तक आप जिंदा रहते हैं. तो आपको आप द्वारा किया गया सारा पेमेंट वापस दे दिया जाता है.

इसलिए दोस्तों अगर कंपनियां आपको यह दोनों पॉलिसियों खरीदने के लिए बोले तो आपको यह नहीं लेनी चाहिए. क्योंकि वह सारी कंपनियां आपसे ज्यादा प्रीमियम लेकर उसको कहीं और इन्वेस्ट कर देती हैं. और ऐसा करने से उसका फायदा आपको नहीं मिलेगा. तो दोस्तों उम्मीद करते हैं. आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी.

 

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