क्या ताजमहल की ये बातें आप जानते हो ? 20 Rare Facts About Taj Mahal

20 Rare Facts About Taj Mahal

दोस्तों आज हम आपको ताज महल के बारे में कुछ ऐसी बातें बताएँगे. जिन्हें आप नहीं जानते होंगे. और इन बातों को जानकर आपको भी बहुत हैरानी होगी इसलिए दोस्तों इसको लास्ट तक जरूरत पढ़िए गा.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जब भारत आए थे. तो उन्होंने ताजमहल को देखने के बाद कहा था कि जिंदगी में आज मुझे पहली बार एहसास हुआ है कि दुनिया में दो ही तरह के लोग हैं एक जिन्होंने ताजमहल देखा है और एक वह जिन्होंने ताज नहीं देखा है. चाहे इस दुनिया में एक से बढ़कर एक खूबसूरत इमारतें हैं. लेकिन ताज के सामने यह सब फीकी पड़ जाती हैं. क्योंकि इसकी बुनियाद में एक बादशाह ने अपना दिल रखा है. इसलिए आप इसको पूरा जरूर पढ़ना क्योंकि यह बातें नहीं जानते होंगे.

1. हजारों लोग जो ताजमहल को देखने के लिए वहां पर जाते हैं और वह यह नहीं जानते कि जो वह देख रहे हैं वह ताजमहल का पिछला हिस्सा है. क्योंकि जो इसका मुख्य दरवाज़ा है वह नदी के किनारे दूसरी तरफ है. इसीलिए आज पर्यटक ताज को वैसा नहीं देख पाते जैसा कि शाहजहाँ इसे दिखाना चाहते थे. मुगल राज में ताज तक पहुंचने के लिए नदी ही एकमात्र रास्ता था. और इसे हाई वे की तरह इस्तेमाल किया जाता था. बादशाह और उसके शाही मेहमान नाव में बैठकर ताजमहल तक पहुंचते थे. नदी के किनारे एक चबूतरा भी हुआ करता था. लेकिन नदी के बढ़ने के कारण वह चबूतरा समाप्त हो गया. बादशाह और उसके मेहमान इस चबूतरे से ही ताज आया करते थे.

2. दोस्तों अक्सर ऐसा कहा जाता है कि ताजमहल को बनाने वाले मज़दूरों के हाथों को बादशाह ने कटवा दिया था. लेकिन यह बात झूठ लगती है क्योंकि इस बात का कोई भी पुख्ता सबूत आज तक नहीं मिल पाया है. बहुत सारे खोजकर्ता का यह मानना है कि बादशाह ने उन मज़दूरों को जिंदगी भर की मजदूरी देकर यह करारनामा लिखवाया था कि वह कोई भी ऐसी दूसरी इमारत नहीं बनाएँगे.

3. ताजमहल की जो चार मीनार ए हैं वह बिल्कुल सीधी नहीं खड़ी हैं बल्कि यह बाहर की ओर झुकी हुई है. ऐसा काम गलती से नहीं किया गया था बल्कि इन मीनारों को ऐसा ही बनाया गया था. क्योंकि भूकंप जैसी आपदा आने पर भी अगर यह मीनारें गिरे हैं तो बाहर की और ही गिरे. जिससे मुख्य मक़बरे को कोई भी नुकसान ना पहुंच सके.

4. कुतुबमीनार भारत की सबसे ऊंची मीनार है. लेकिन आप लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि ताजमहल की ऊंचाई क़ुतुब मीनार से भी ज्यादा है. ताजमहल की ऊंचाई 73 मीटर है. जबकि क़ुतुब मीनार की ऊंचाई सिर्फ 72.5 मीटर है.

5. दुनिया में जितनी भी ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं. उनमें से सबसे ज्यादा खूबसूरत कैलीग्राफी सिर्फ ताज पर ही मौजूद है. जैसे ही आप ताजमहल के बड़े दरवाज़े से अंदर की तरफ जाते हो दरवाज़े पर सुंदर अक्षरों में लिखा हुआ यह श्लोक आपका स्वागत करता है.
“ हे आत्मा तू ईश्वर के पास विश्राम कर, ईश्वर के पास शांति के साथ रह, तथा उसकी परम शांति, तुझ पर बरसे ”
इस कैलीग्राफी को Thuluth लिपि में लिखा गया. और इसको डिज़ाइन करने वाले का नाम अब्दुल हक था. जिनको ईरान से बुलवाया गया था. शाहजहाँ ने उसकी चकाचौंध कर देने वाली कला को देखते हुए उसे उपाधि के तौर पर अमानत खान नाम दे दिया था.

6. जिस समय शाहजहाँ बादशाह बने थे. तब वह मुगल सल्तनत का सबसे सुन्हेरा दौर था. क्योंकि उस समय चारों तरफ अमन और खुशहाली थी. प्रजा के लिए बादशाह का हुक्म ही सबसे ऊंचा होता था. शाहजहाँ के समय में लड़ाइयां नहीं होती थी. वह जबर्दस्त शानो शौकत और एशो इशरत का दौर था. बादशाह को बड़ी-बड़ी इमारतें बनाने का शौक था. उन्होंने मुगल वास्तु कला के साथ भारत के प्राचीन इतिहास को मिला दिया था.

7. दुनिया ने ऐसी भव्य इमारत पहले कभी भी नहीं देखी थी. इसके लिए सफेद संगमरमर Rajasthan के Makrana से लाया गया था. Jade and Crystal को चाइना से, Lapis Lazuli को अफग़ानिस्तान से, Turquoise को तिब्बत से, Jasper को पंजाब से, Sapphire को श्रीलंका से, और Carnelian को अरब से मंगवाया गया था. कुल मिलाकर ऐसी ही किस्म के 28 बेशकीमती रत्नों को संगमरमर के पत्थर में जोड़ा गया था. इन सभी चीजों को विदेशों से आगरा लाने के लिए 1000 से भी ज्यादा हाथियों का इस्तेमाल किया गया था.

8. ताजमहल आज से 400 साल पहले 1631 में बनना शुरू हुआ था. और यह 5 साल बाद 1653 में बनकर तैयार हुआ था. इसका निर्माण 20000 कारीगरों और मज़दूरों ने मिलकर किया था. पूरी दुनिया में वास्तु कला का शानदार नमूना, इसके अलावा कोई भी नहीं है. ताजमहल के निर्माण के वक्त हर एक चीज को हीरे की तरह परख कर चुना गया था. ताजमहल की दीवारों पर जो निकासी की गई है उसे इटली के कारीगरों से सीखा गया था. Uzbekistan Bukhara से संगमरमर को तराशने वाले कारीगरों को बुलाया गया था. संगमरमर पर कैलीग्राफी करने वाले कारीगर ईरान से आए थे. और पत्थरों को तराशने के लिए Balochistan से कारीगरों को बुलवाया गया था. 1653 में जब ताज बनकर तैयार हुआ था तो इसकी कीमत करोड़ों में मापी गई थी. और उसी हिसाब से अगर आज के समय में ताज को बनवाया जाए तो इसे बनाने में 57 अरब 60 करोड़ रुपए लगेंगे.

9. 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने ताजमहल को काफी नुकसान पहुंचाया था. उन्होंने Lapis Lazuli जैसे बेश कीमती रत्नों को ताजमहल की दीवारों से खोदकर निकाल लिया था. और अपने साथ विदेश लेकर चले गए थे.

10. ताजमहल की मुख्य गुंबद का जो कलश वह पिछले जमाने में बहस सोने का हुआ करता था. जिसे 19 सदी की शुरुआत में सोने के कलश को बदलकर कासे का कलश लगवा दिया गया.

11. इतिहास कारों का मानना है कि 37 लोगों के एक समूह ने मिलकर ताजमहल के नक्शे को तैयार किया था.और इन 37 वास्तु कारों को दुनिया के कोने-कोने से बुलवाया गया था. लेकिन खोज करता को इसका कोई भी पुख्ता सबूत अभी तक नहीं मिल पाया है.

12. ताजमहल की निह बनाते समय ताज के चारों तरफ कुएँ खोदे गए थे. इन कुओं में इट और पत्थर के साथ-साथ आबनूस और महोगनी की लकड़ियों के बड़े-बड़े लट्ठे डाले गए थे. यह कुएँ ताज की न्यू को मजबूत बनाने में कारगर है. आबनूस और महोगनी की लकड़ियों में यह ख़ासियत होती है कि इन्हें जितनी भी नमी मिलती रहेगी यह उतनी ही मजबूत बनी रहेगी. इन लकड़ियों को नमी ताज के पास बहने वाली यमुना नदी के पानी से मिलती है. यमुना के पानी का स्तर हर साल कम होता जा रहा है. जिसके कारण लकड़ियों में नमी की कमी आ गई है. इसी वजह से सन 2010 में ताज में दरारें देखी गई.

13. 1989 में एक भारतीय लेखक Purushottam Nagesh Oak एक किताब लिखी थी. जिसका नाम था Taj Mahal : The True Story. इस किताब में उन्होंने कई तर्क के साथ यह दावा किया था कि ताजमहल मकबरा बनने से पहले एक शिव मंदिर था. और इसका नाम Tejo Mahalaya था. सन 2000 में Purushottam ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए ताजमहल को खोजने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था. आरके लॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मुताबिक ताजमहल एक शिव मंदिर था इस बात का कोई सबूत नहीं है. बल्कि शाहजहाँ ने ताजमहल को बनवाया था. इस बात के सबूत इतिहास के पन्नों में मिलते हैं.

14. दोस्तों कहां जाता है कि शाहजहाँ मुमताज के मक़बरे की तरह ही काले संगमरमर के पत्थर से एक दूसरा ताजमहल अपने लिए यमुना नदी के दूसरी तरफ बनवा-ना चाहता था. लेकिन इससे पहले कि वह काला ताजमहल बनवा पाए औरंगज़ेब ने उन्हें कैदखाने में डलवा दिया था. लेकिन दोस्तों इतिहास कारों का मानना है कि यह बाद में बनाई गई मन गड़त कहानी है. क्योंकि जिस जगह पर शाहजहाँ के काला ताजमहल बनवाने की बात कही जाती है. वहां पर कई बार खुदाई की जा चुकी है लेकिन उन्हें कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला है. जिससे कि पता चल सके कि शाहजहाँ एक और काला ताजमहल बनवा-ना चाहते थे.

15. ताजमहल का डिज़ाइन वैसे तो हिमायू के मक़बरे से प्रेरित दिखता है. हिमायू शाहजहाँ के पर दादा थे. इनके द्वारा बनवाया गया यह मकरबा हिंदुस्तान में आगे बनने वाली खूबसूरत इमारतों के लिए प्रेरणा बना था.

16. दूसरे विश्व युद्ध में सरकार ने मक़बरे के चारों ओर बाँस का घेरा बनाकर एक सुरक्षा कवच तैयार करवाया था. जिसे के हवाई बम बाजो को भ्रमित किया जा सके और यह जर्मन और जापानी हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान कर सकें. 1965 और 1971 भारत और पाकिस्तान के युद्ध के समय भी यही किया गया था.

17. दोस्तों वैसे कई देशों में ताजमहल की नकल पर आधारित बनी हुई इमारतें मौजूद है. जैसे कि चीन बांग्लादेश और कोलंबिया में ऐसी ही इमारतें बनाई गई. और ऐसी ही एक इमारत हमारे भारत में भी वजूद है इसे बीबी का मकबरा कहा जाता है. यह मकबरा महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित है. इस मक़बरे को मुगल बादशाह Azam Shah ने अपनी मां Dilras Banu Begum की याद में 17वीं सदी के आखिर में बनवाया था. इसको ताजमहल की तर्ज पर ही बनवाया गया था. इस मक़बरे का गुंबद ताजमहल के गुंबद से छोटा है. लेकिन इसका सिर्फ गुंबद ही संगमरमर से बना है. और बाकी का निर्माण प्लास्टर से किया गया है.

18. ताजमहल का लोकप्रिय होने का सबसे बड़ा कारण इससे जुड़ी हुई एक प्रेम कहानी है. बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेग़म मुमताज की याद में इस मक़बरे को बनवाया था. मुमताज का असली नाम Arjumand Banu Begum था. और शाहजहाँ ने मुमताज महल नाम दिया था. यानी महल का सबसे अनमोल रतन महज 38 साल की उम्र में अपनी 14 वी संतान को जन्म देते वक्त मुमताज की मृत्यु हो गई थी. उस समय मुमताज बुरहानपुर में थी. अपनी प्रिय बेग़म की मृत्यु के कारण बादशाह बहुत दुखी हुए. और उन्हें ऐसा लगता था कि जैसे उनकी जिंदगी ही तबाह हो गई हैं. आखिरकार शाहजहाँ ने उनकी याद में ताज को बनाने का फरमान जारी किया था.

19. मुमताज की मौत के बाद उन्हें पहले बुरहानपुर में ही दफनाया गया था. इसके बाद फिर शाहजहाँ ने ताज को बनवा-ना शुरू किया. तब बुरहानपुर से मुमताज के शव को निकालकर ताजमहल के पास एक बगीचे में दफनाया गया. ताजमहल को बनाने में 22 साल लगे और तब तक मुमताज का शव बगीचे में ही दफ़न रहा. फिर बाद में उसे वहां से निकाल कर ताजमहल के मुख्य गुंबद के नीचे दफनाया गया.

20. शाहजहाँ का सारा ध्यान उस समय ताजमहल को एक खूबसूरत रूप देने में लगा रहा. इसी बीच शाहजहाँ के बेटे औरंगज़ेब में आगरा पर हमला करके अपने पिता को कैद कर लिया. जब शाहजहाँ से पूछा गया कि वह क्या चाहते हैं तब उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी जगह पर बंदी बनाकर रखा जाए जहां से वे सीधे ताज को देख पाएँ. लेकिन उनकी इस ख़्वाहिश को पूरा किया गया. कैद में रहते हुए भी शाहजहाँ हर वक्त ताज को देखते रहते थे. और ताज को देखते देखते ही उन्होंने अपनी जिंदगी की अंतिम सांस ली थी. मृत्यु के बाद उन्हें मुमताज की कबर के पास ही ताजमहल में दफनाया गया. एक हारे और थके हुए बादशाह को अगर किसी ने गिरने नहीं दिया तो वह उनका मुमताज के प्रति बेइंतेहा प्यार था. जिस शिदत के साथ यह प्यार की अनोखी निशानी बनकर तैयार हुई. उसकी मिसाल आज पूरी दुनिया के सामने हैं. शाहजहाँ जानते थे कि यह दौलत और शानो शौकत वक्त के साथ एक दिन खत्म हो जाएगी. इसीलिए उन्होंने सोचा कि ऐसी यादगार चीज बनाई जाए जो कि हमेशा रहे. और शाहजहाँ ने अपनी प्रिय की याद में ताज को बनवाया. आज बादशाह नहीं रहा और उसकी दौलत, हुक़ूमत, नहीं रही और उसकी सल्तनत को भी खत्म हुए कई जमाने गुज़र गए है. लेकिन एक ताज है जिसमें बादशाह की सदियों पुरानी प्रेम कहानी को खुद में संजोकर आज भी जिंदा रखा है. प्राकृतिक की गोद में चाँद सी जगमगाती यह भव्य इमारत सदियों से दो प्रेमियों के प्यार की अमर कहानी सुनाती आई है और सदियों तक सुन-आती रहेगी.
तो दोस्तों इस जानकारी में बस इतना ही अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें.

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