how diamonds are made in hindi

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दोस्तों क्या आप लोगों ने कभी यह सोचा है की हीरा कैसे बनता है. शायद आपने यह कभी सोचा ही नहीं होगा. लेकिन हां आपने बचपन में इसके बारे में पढ़ा तो जरूर होगा. आपको सिर्फ यही मालूम होगा कि हीरा कोयले की खदान से निकलता है. लेकिन यह बात 90% तक बिल्कुल सही है. आखिर कार यह हीरा कैसे बनता है. या इंसानों द्वारा कैसे बनाया जाता है. यह सवाल आपके मन में भी जरूर उठ रहा होगा. इसलिए आज हम आपको हीरे के बारे में पूरी डिटेल से बताने वाले हैं.
आपको मालूम ही होगा कि हीरे सदा से ही राजसी भहभभ और विलासिता के प्रतीक हैं. भारत देश हजारों सालों से इसके कारोबार का केंद्र बना रहा है. आपको यह बात पता नहीं होगी कि रोमन देश के लोग हीरो को भगवान के आँसू भी मानते हैं. 2013 में भारत की कई बड़ी और छोटी उद्योग खदानों को मिलाकर केवल 40 हजार कैरेट हीरे ही इकट्ठे किए गए थे. जो कि उस वर्ष में पूरे विश्व के उत्पादन 132 मिलियन कैरेट के 1% हिसे से भी कम था. बहुत से लोगों का मानना है कि दुनिया के सबसे पहले हीरे की खोज आज से लगभग 4000 साल पहले भारत के गोलकुंडा क्षेत्र आधुनिक हैदराबाद नदी के किनारे चमकदार रेत में की गई थी. और आपको शायद यह पता होगा कि पश्चिमी भारत के औद्योगिक शहर सूरत में दुनिया के 90% हीरो को काटने और पॉलिश करने का काम किया जाता है. और इसी काम के कारण दुनिया में करीब 500000 लोगों को रोज़गार मुहैया करवाया गया है.
हीरे कहां बनते हैं.
वैज्ञानिकों के मुताबिक जमीन से लगभग 160 किलोमीटर नीचे बेहद ही गरम माहौल में हीरे बनते हैं. इसके बाद ज्वालामुखी की गतिविधियों के कारण यह हीरा ऊपर की तरफ आ जाता है. कई बार ग्रहों और उल्का पिंड की टक्कर से भी हीरे मिल जाते हैं. हीरे अत गहराई में बहुत ज्यादा दबाव और तापमान के बीच कार्बन के अनु जब बेहद ही अनोखे ढंग से जुड़ जाते हैं. तब जाकर यह कहीं हीरे जैसे दुर्लभ पत्थर में बदल जाते हैं.
हीरा किस चीज का बना होता है. 
हीरा एक पारदर्शी पत्थर होता है. यह रासायनिक रूप में कार्बन का एक शुद्धतम रूप होता है. और इसमें बिल्कुल भी किसी चीज की मिलावट नहीं होती है. यदि आप एक हीरो को ओवन में रखकर 700 डिग्री सेल्सियस पर गर्म करेंगे तो यह जलकर कार्बन डाइऑक्साइड रूप में बदल जाता है. और इसके पीछे बिल्कुल भी राख नहीं बचती है. इसी प्रकार हीरे 100% कार्बन से ही बनते हैं. हीरा रासायनिक तौर पर बहुत ही निष्क्रिय होता है. यह सभी घोलको में आधुनिक सील होता है. इसका अपेक्षित घनतब 3.51 होता है.
भारत में हीरे की खदान कहां है. 
भारत में पन्ना और बुंदेर परियोजना, मध्य प्रदेश, कोल्लूर खान, गोलकुंडा आंध्र प्रदेश में हीरे की खदाने पाई जाती हैं. आप को यह बात पता नहीं होगी कि कोहिनूर नाम का प्रसिद्ध हीरा गोलकुंडा खदान से ही मिला था. जो कि आजकल ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के मुकुट में लगकर उसकी शोभा बढ़ा रहा है.
हीरा मजबूत क्यों होता है.
हीरे में सभी कार्बन परमाणु बहुत ही शक्तिशाली आपसी बंधन द्वारा जुड़े होते हैं. और इसीलिए यह इतना मजबूत होता है. धरती पर मौजूद प्राकृतिक पदार्थों में से सबसे ज्यादा हीरा कठोर होता है. इसमें मौजूद इलेक्ट्रॉन एक दूसरे से बड़े ही मजबूत तरीके से जुड़े होते हैं. और इसमें एक भी इलेक्ट्रॉन सुतंतंत्र नहीं होता है. इसीलिए हीरा उत्तम तथा विद्युत का चालक होता है.
असली हीरे को कैसे पहचान सकते हैं.
अमेरिका के जामा लॉजिकल इंस्टिट्यूट की शोध के मुताबिक बेहद गहराई से निकलने वाले हीरे रसायानिक रूप से पूरी तरह से शुद्ध होते हैं. और यह कुदरती रूप से प्रदर्शित होते हैं. प्राकृतिक रूप से बने हुए हीरे और फैक्टरी में बने हुए हीरे में फर्क बता पाना बहुत ही मुश्किल होता है. इसलिए केवल एक खास उपकरण से असली हीरो की पहचान की जा सकती है. इसके अलावा आप इन तरीकों से भी असली हीरे की पहचान कर सकते हैं. अगर आप एक असली हीरे को पानी के भरे गिलास में डालते हो तो असली हीरा पानी में डूब जाता है और नकली हीरा पानी पर तैरता ही रहता है. और दूसरा तरीका यह है कि अगर आप एक हीरे को अख़बार पर रखकर इसके अंदर से अक्षरों को पढ़ने की कोशिश करते हैं. लेकिन अगर आपको टेढ़ी लकीरे दिखती हैं. तो इसका मतलब आप का हीरा नकली है.
क्या इंसान दोबारा हीरा बनाया जा सकता है.
यह बिल्कुल सच है कि इंसानों द्वारा हीरे बनाए भी जा सकते हैं. इसके लिए भूनी हुई मूंगफली को पीसकर (जिसे पीनट बटर भी कहा जाता है) इस पेस्ट को धरती की सतह से 800 से 900 किलोमीटर नीचे भारी दबाव के बीच रखा जाए तो यह क्रिस्टल की आणविक संरचना बदल जाता है. और वह हीरे में परिवर्तित हो जाता है. इसके अलावा आपको बता दें कि अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में सरस्वता इलाके में हीरो को बनाया जाता है. यहां पर हीरो की खेती भी की जाती है. हीरे के एक छोटे से टुकड़े को यहां पर एक बीज के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. हीरे को कार्बन के साथ मिलाकर एक ग्रेट चेंबर में डाला जाता है. उसके बाद फिर इसे एक रिएक्टर में लाया जाता है. रिएक्टर का तापमान और दबाव बिल्कुल ही पृथ्वी की तरह होता है. लगभग 3000 डिग्री सेल्सियस और 50,000 एटमॉस्फेयर दबाव में ग्रेनाइट हीरा बनने लगता है. इस तरीके से हीरे को बनाने में लगभग 80 घंटे का समय लग जाता है. और इस समय में हीरे का एक छोटा टुकड़ा कच्चा हीरा बन कर तैयार हो जाता है. फिर इसे एक एसिड के गोल में डालकर अलग किया जाता है. अब तो आपको पता लग ही गया होगा कि इंसानों द्वारा हीरा कैसे बनाया जाता है. दोस्तों अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं. और इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर भी जरूर करें.

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