इन 3 कारणों से स्त्री तुलसी पूजा नहीं कर सकती सबसे बड़ा घोर अनर्थ माना जाता है Tulsi puja

तुलसी की पूजा इन तीन महिलाओं को कभी नहीं करनी चाहिए. ऐसी टीम बनाएं अगर तुलसी के पास भी जाती हैं तो उन्हें घोर पाप लगता है.

हिंदू धर्म में तुलसी को सर्वश्रेष्ठ और पूजनीय माना जाता है. शास्त्रों में बताया गया है कि जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता वहां पर नकारात्मकता वास करती है. आप लोगों को बता दें कि तुलसी ना केवल धार्मिक रूप से बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी बहुत ही गुणकारी मानी जाती है. और तुलसी में बहुत सारे अनेकों औषधीय गुण पाए जाते हैं. लेकिन तुलसी के भी कई प्रकार होते हैं जैसे कि रामा तुलसी, श्यामा तुलसी, स्वेते विष्णु तुलसी, बन तुलसी और नींबू तुलसी. लेकिन ज्यादातर मुख्य रूप में घरों पर राम तुलसी श्याम तुलसी ही रखी जाती है. और बाकी तुलसियों को घर में रखना शास्त्रों के अनुसार सही नहीं माना जाता. शास्त्रों के अनुसार देव उठनी एकादशी पर तुलसी विवाह को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है. तुलसी विवाह से ना केवल शुभ फलों की प्राप्ति होती है. बल्कि कन्या दान जैसे बड़े पुण्य की प्राप्ति भी होती है.

लेकिन आपको यह नहीं पता होगा कि किन तीन महिलाओं को इस की पूजा नहीं करनी चाहिए. और अगर यह महिलाएं माता की पूजा करती हैं. तो माता का अपमान माना जाता है. जिसके कारण तुलसी माता क्रोधित भी हो सकती हैं. तो चलिए जानते हैं.

क्या मासिक धर्म में तुलसी पूजा करनी चाहिए.

दोस्तों पुरानी मान्यता के अनुसार जब द्रोपती का अपमान हुआ था. जब युधिस्टर जुए में सब कुछ हार गया था. तो दुर्योधन ने दुशासन को द्रोपती को लाने के लिए भेजा. लेकिन कहा जाता है कि उस समय द्रोपती राजस्वाला मासिक धर्म के दौरान थी. और वह सिर्फ एक कमरे में एक वस्त्र पहने कर रह रही थी. लेकिन इस बात से यह तो पता चल ही जाता है कि यह व्यवस्था प्राचीन काल से ही चली आ रही है. पुराने काल में ऐसी महिलाओं को कुव भवन में रहना पड़ता था. तो इससे यह पता चलता है कि महिलाओं को पूजा पाठ, तुलसी पूजा ऐसे समय में मैंने कभी नहीं करनी चाहिए. और अगर वह ऐसा करती हैं तो उसे पाप लगता है.

चरित्रहीन व्यक्ति और मन में गंदे विचार.

कहा जाता है कि एक चरित्रहीन व्यक्ति को तुलसी के पौधे से दूर रहना चाहिए. क्योंकि ऐसे व्यक्ति की पूजा तुलसी माता कभी भी सरकार नहीं करती. शास्त्रों के अनुसार अगर आपके मन में गलत विचार आते हैं. और साथ ही आप दूसरों के प्रति गलत भावना अपने मन में रखते हैं. तो आप तुलसी पूजा और तुलसी विवाह करने के बिल्कुल लायक नहीं है. और ऐसे व्यक्ति की पूजा माता तुलसी कभी भी सरकार नहीं करती और उस पर क्रोधित हो जाती हैं. इसलिए अगर आप सच्चे मन से माता तुलसी की पूजा करते हैं तभी आपकी पूजा स्वीकार कर ली जाएगी.

शादीशुदा महिलाएं.

खास तौर पर सुहागन स्त्री के लिए तुलसी पूजा बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है. तुलसी विवाह को पुणे रूप से करने में वैवाहिक जीवन सफल रहता है. और आपका सात जन्मो तक का साथ बना रहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आपने हिंदू रीति रिवाज़ों के अनुसार सात फेरे नहीं लिए हैं. तो आप गलती से भी तुलसी के पौधे के पास ना जाएं. इसलिए इस अवस्था में आप तो सी पूजा नहीं कर सकते. शास्त्रों में इस बात की सखत मनाही है कि बिना सात फेरे लिए हुए कोई भी पहला तुलसी की पूजा नहीं कर सकती. लेकिन अगर आप ने कोर्ट मैरिज कर रखी है तब भी आप तुलसी पूजा करने में सक्षम नहीं है. इसलिए पहले आप को हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार सात फेरे लेने होंगे फिर उसके बाद ही आप तुलसी की पूजा कर सकते हैं. और इसके बाद आप किसी भी धार्मिक कार्यों में शामिल भी हो सकते हैं. इसलिए अगर आप शास्त्रों के विरुद्ध जाकर ऐसा कुछ करते हैं तो आप पाप के भागीदार होते हैं. और माता तुलसी आपसे नाराज भी हो सकती हैं. दोस्तों लेकिन भले ही कुंवारी कन्या तुलसी पूजा कर सकती है. लेकिन अगर आपने हिंदू रीति-रिवाज़ों के अनुसार सात फेरे नहीं लिए हैं तो आप तो उसी की पूजा नहीं कर सकते हैं.
तो दोस्तों आप लोगों में से कौन चाहता है कि माता तुलसी हमेशा के लिए आपके घर में वास बना ले तो कमेंट बॉक्स में लिखें माता तुलसी तेरी सदा जय हो. और इस जानकारी को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर भी जरूर करें.

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